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*कैबिनेट मंत्री ने किया स्मार्ट कंट्रोल रूम का निरीक्षण, निगरानी व्यवस्था की ली जानकारी*
जनपद भ्रमण के दौरान माननीय कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक ने जिला मुख्यालय स्थित स्मार्ट कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर संचालित आधुनिक निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस अवसर पर अधिकारियों ने उन्हें कंट्रोल रूम में स्थापित सीसीटीवी नेटवर्क, रियल टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था के संबंध में अवगत कराया। मा. मंत्री ने विभिन्न स्थानों की निगरानी संबंधी व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन में तकनीक के प्रभावी उपयोग की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की सुरक्षा एवं सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्मार्ट निगरानी प्रणाली का और अधिक प्रभावी ढंग से संचालन सुनिश्चित किया जाए।
इस दौरान गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान,जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान,जिलाध्यक्ष भाजपा नागेन्द्र चौहान, दर्जाधारी राज्यमंत्री प्रताप पंवार,प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. स्वराज विद्वान, पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित
*आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील जिला,आपसी समन्वय और तत्परता से काम करें सभी विभाग— कैबिनेट मंत्री।*
*उत्तरकाशी 25 जून,सूचना-* मानसून सीजन के दौरान संभावित आपदा और भूस्खलन की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। एक दिवसीय जनपद दौरे पर पहुंचे सूबे आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास,पंचायती राज,आयुष एवं आयुष शिक्षा,पुनर्गठन एवं जनगणना मंत्री मदन कौशिक ने मानसून आगमन से पूर्व अधिकारियों की बैठक लेते हुए सभी तैयारियाँ समय से पूरी करने के निर्देश दिए।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री ने कहा कि बरसात में भूस्खलन के कारण दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क कट जाता है, इसलिए मानसून शुरू होने से पहले ही इन गांवों में खाद्यान्न,ईंधन और घरेलू गैस (एलपीजी) जीवन रक्षक औषधि की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
कैबिनेट मंत्री ने एनएच,लोक निर्माण विभाग,पीएमजीएसवाई को निर्देश देते हुए कहा कि जनपद के जिन मार्गों पर सड़क बंद होने की आशंका सबसे अधिक है,उन्हें चिन्हित कर दोनों ओर जेसीबी और पोकलैंड मशीनें तैनात रखी जाए।ताकि मार्ग अवरुद्ध होने पर उसे तत्काल खोलकर यातायात सुचारू किया जा सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि सड़क मार्ग से कटे दूरस्थ गांवों के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती की जाए। जल संस्थान और विद्युत विभाग को भी बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए आपदा के दौरान पर्याप्त संसाधन रिजर्व रखने को कहा गया है। कैबिनेट मंत्री ने आपदा के दौरान यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सड़क मार्ग के अवरुद्ध होने पर उसके आस-पास संचालित दुकानों, होटलों और ढाबों में अनिवार्य रूप से रेट लिस्ट चस्पा की जाए, ताकि यात्रियों से अवैध वसूली न हो सके। साथ ही आपदा शेल्टरों में सभी आवश्यक सुविधाएं चाक-चौबंद रखी जाए।
मानसून पूर्व तैयारियों की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में कुल 25 संवेदनशील जोन चिन्हित किए गए हैं, जहां सड़कें खोलने के लिए 60 से अधिक जेसीबी और पोकलैंड मशीनें तैनात की गई हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में आपातकालीन स्थिति के लिए 68 विद्यालयों को शेल्टर होम के रूप में चिन्हित किया गया है। ग्राउंड पर राहत कार्य के लिए एसडीआरएफ की 6 और एनडीआरएफ की 2 टीमें तैनात की गई हैं।
आपातकालीन सेवा के लिए जनपद में 19 सक्रिय हेलीपैड पूरी तरह तैयार हैं, जबकि 53 अन्य मैदानों को भी हेलीपैड के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए चिन्हित किया गया है।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री ने कहा कि आपदा के दृष्टिकोण से यह जनपद बेहद संवेदनशील है। ऐसे में सभी विभागों को आपसी समन्वय और पूरी तत्परता के साथ धरातल पर कार्य करना होगा। हमारा एकमात्र ध्येय और लक्ष्य यही होना चाहिए कि आपदा की स्थिति में जान-माल का कम से कम नुकसान हो।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान,डीएम प्रशांत आर्य,विधायक सुरेश चौहान,दर्जा राज्य मंत्री प्रताप पंवार,जिलाध्यक्ष भाजपा नागेंद्र चौहान,पूरे विधायक विजयपाल सजवान,प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डॉ.स्वराज विद्वान,भाजपा नेता पवन नौटियाल,शशिकांत नेगी सहित सीडीओ जय भारत सिंह,डीएफओ डीपी बलूनी,सीएमओ बीएस रावत,एसडीएम शालिनी नेगी,जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं आदि अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
*उत्तरकाशी,25 जून (सूचना)।*
एक दिवसीय उत्तरकाशी दौरे पर पहुंचे प्रदेश के आयुष,आयुष शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक ने जिला सभागार में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। कैबिनेट मंत्री ने आयुष एवं पंचायती राज विभाग के अंतर्गत चल रहे कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
कैबिनेट मंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर देते हुए जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी से जनपद के सभी आयुर्वेदिक चिकित्सालयों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं के स्टॉक और प्रतिदिन होने वाली ओपीडी के आंकड़ों की विस्तृत समीक्षा की। मंत्री ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में पारंपरिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा का बहुत महत्व है, इसलिए चिकित्सालयों में किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए। स्थानीय नागरिकों और प्रवासियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जनपद के सभी वैलनेस सेंटरों को सक्रिय रखा जाए। उन्होंने कहा कि इन सेंटरों में योग और प्राणायाम जैसी स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियां नियमित रूप से संचालित की जाए,ताकि आम जनता को इनका सीधा लाभ मिल सके।
कैबिनेट मंत्री ने पंचायती राज विभाग की समीक्षा करते हुए ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे के निर्माण और ग्राम पंचायतों के स्तर पर जनहित के कार्यों की प्रगति जानी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास कार्यों को तय समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान,जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, विधायक सुरेश चौहान, दर्जा राज्य मंत्री प्रताप पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान, पूर्व विधायक विजयपाल सजवान, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डॉ. स्वराज विद्वान, भाजपा नेता पवन नौटियाल, शशिकांत नेगी सहित मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह, डीएफओ डीपी बलूनी, सीएमओ डॉ. बीएस रावत सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
उत्तरकाशी जनपद के श्रीकोट चिन्यालीसौड़ की भाई-बहन की जोड़ी ने जज्बे और मेहनत से लिखी सफलता की कहानी।
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*मतदाता सूची शुद्धिकरण,पुरोला, यमुनोत्री और गंगोत्री के कई बूथों पर डिजिटाइजेशन का कार्य शत-प्रतिशत पूरा।**तीनों विधानसभा में 78.31 फीसदी डिजिटाइजेशन।*
*उत्तरकाशी 26 जून सूचना।* विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत जिले में मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित और शुद्ध बनाने का अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। निर्वाचन टीम लगातार इस कार्य को तेजी से पूरा करने में जुटी हुई है।जिले की विधानसभाओं में डिजिटाइजेशन के कार्य ने खासी रफ्तार पकड़ी है। अब तक कुल 78.31 फीसदी के साथ कई पोलिंग बूथों पर शत-प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है।
पुरोला विधानसभा में सबसे तेज गति से काम होते हुए कुल 45 पोलिंग बूथों पर डिजिटाइजेशन का कार्य 100 फीसदी पूरा कर लिया गया है।यमुनोत्री विधानसभा में भी रफ्तार बेहतर बनी हुई है और अब तक 41 पोलिंग बूथ पूरी तरह डिजिटाइज हो चुके हैं।गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र में भी 18 पोलिंग बूथों पर शत-प्रतिशत शुद्धिकरण और डिजिटाइजेशन का काम मुकम्मल हो गया है।
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निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत मतदाता सूची के शुद्धिकरण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि जनपद में विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य गतिमान है। जनपद में लगभग 2.42 लाख मतदाता है जिनका डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है अभी तक लगभग 90 प्रतिशत मतदाताओं का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। यह कार्य 07 जुलाई 2026 तक चलेगा जिसे पूर्ण करने का कार्य किया जा रहा है। बूथ लेवल और जनपद स्तर पर भी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी सहयोग लिया जा रहा है। निर्धारित कैलेंडर के अनुसार 08 जुलाई से आपत्ति प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
*विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर सीडीओ ने की समीक्षा,व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के दिए निर्देश।*
*उत्तरकाशी 27 जून सूचना-* मुख्य विकास अधिकारी एवं नोडल अधिकारी स्वीप जय भारत सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को एसआईआर की समीक्षा बैठक हुई। सीडीओ ने भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के क्रम में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जन-जागरूकता गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखण्ड, देहरादून के पत्रानुसार निर्धारित सभी गतिविधियों का समयबद्ध और प्रभावी आयोजन किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए,ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता बनने से वंचित न रहे।
*सभी हितधारकों तक व्यापक पहुँच बनाने के निर्देश।*
नोडल अधिकारी स्वीप ने विभिन्न स्तरों पर समन्वय स्थापित करते हुए सामाजिक संगठनों, ग्राम प्रधानों,महिला स्वयं सहायता समूहों,जिला पंचायत,क्षेत्र पंचायत सदस्यों के माध्यम से भी अभियान को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के लिए राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का सक्रिय सहयोग लेने के निर्देश स्वीप टीम को दिए। साथ ही कॉलेजों और महाविद्यालयों में नए व युवा मतदाताओं (18-19 वर्ष) के पंजीकरण के लिए विशेष जागरूकता कैंप आयोजित किए जाए। उन्होंने कहा कि प्रिंट,इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया संगठनों सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के माध्यम से भी जन-जन तक जागरूकता संदेश पहुँचाया जाए।
*मतदाता सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 सक्रिय,ERO-AERO स्तर पर बने है हेल्प डेस्क।*
मुख्य विकास अधिकारी/नोडल अधिकारी स्वीप ने कहा कि निर्वाचन या मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के समाधान के लिए नागरिक निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल कर सकते हैं।इसके अलावा मतदाताओं की सीधी सहायता के लिए सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के स्तर पर विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इन सुविधाओं का लाभ उठाकर मतदाता सूची में अपना पंजीकरण व संशोधन समय से पूरा कराएं।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र अमोली,जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल संदीप नेगी,जिला विकास अधिकारी रमेशचंद्र आर्य,जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी राकेश मोहन राणा, खंड शिक्षा अधिकारी हर्षा रावत,स्वीप प्रभारी डॉ शम्भू प्रसाद नौटियाल आदि अधिकारी उपस्थित रहे और अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।
*उत्तरकाशी पुलिस प्रशासन की संपूर्ण खबरों के लिए देखिए GANGA 24 EXPRESS पर महेश बहुगुणा & टीम के साथ= 8126216516*
*ऑपरेशन प्रहारः बड़कोट पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त 1 वांछित अभियुक्त को किया गिरफ्तार।*
*पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, श्रीमती कमलेश उपाध्याय* के निर्देशन में जनपद में संचालित "ऑपरेशन प्रहार" एवं "ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन" के तहत बड़कोट पुलिस द्वारा अवैध चरस की खरीद-फरोख्त के मामले में संलिप्त एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है।
जनवरी 2026 में बड़कोट पुलिस द्वारा हरदयाल एवं प्रदीप नामक दो तस्करों को अल्टो कार से अवैध चरस का परिवहन करते हुए गिरफ्तार कर एनडीपीएस का मामला दर्ज किया गया था। मामले की गहन विवेचना एवं पूछताछ के दौरान चरस के अवैध कारोबार में आनन्द सिंह की संलिप्तता प्रकाश में आई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस द्वारा उसके विरुद्ध धारा 29 एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की गई।
*पुलिस उपाधीक्षक बड़कोट श्री चंचल शर्मा* के निकट पर्यवेक्षण तथा *प्रभारी निरीक्षक बडकोट* के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा साक्ष्य संकलन के उपरान्त पतारसी-सुरागरसी करते हुए *अभियुक्त आनन्द को कल 23 जून 2026 को स्थान रानाचट्टी से गिरफ्तार किया। माननीय न्यायालय द्वारा अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।*
*गिरफ्तार अभियुक्त-* आनन्द सिंह पुत्र भगत सिंह, निवासी ग्राम दागुण, कोतवाली बड़कोट, जनपद उत्तरकाशी, उम्र 32 वर्ष।
*पुलिस टीमः*
• वरिष्ठ उपनिरीक्षक श्री रणवीर सिंह चौहान
• मुख्य आरक्षी श्री बबूल खान
• मुख्य आरक्षी श्री धर्मेन्द्र परमार
• पीआरडी श्री महादेव
*मीडिया सेल, पुलिस कार्यालय उत्तरकाशी।*
*बबीता पाण्डे गुमशुदगी प्रकरण के संबंध में भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहें।*
बबीता पाण्डे गुमशुदगी प्रकरण में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर कुछ व्यक्तियों द्वारा भ्रामक, अपुष्ट एवं तथ्यहीन जानकारी प्रसारित कर आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न की जा रही है।
उक्त मीसिंग प्रकरण के वास्तविक तथ्यों से अवगत कराते हुये *CO उत्तरकाशी, श्री जनक सिंह पंवार* द्वारा बताया गया है कि दयारा ट्रेक से लापता कु. बबीता पाण्डे की तलाश हेतु व्यापक खोज एवं बचाव अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है। अब तक युवती के संबंध में कोई ठोस जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
*श्रीमान पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी महोदया* के निर्देशन में युवती की खोज के लिए मैनुअल सर्चिंग के साथ-साथ स्वान दस्तों, ड्रोन, हवाई सर्वेक्षण एवं अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। प्रकरण के सभी संभावित आपराधिक पहलुओं की भी गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ जांच की जा रही है। सभी उपलब्ध तकनीकी एवं वैज्ञानिक संसाधनों का उपयोग कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अभियान/कार्यवाही की निरन्तर समीक्षा की जा रही है।
उत्तरकाशी पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक, तथ्यहीन, आधारहीन एवं अपुष्ट जानकारी प्रसारित करने वाले अराजक तत्वों को चिन्हित किया जा रहा है। ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सभी नागरिकों से अनुरोध है कि केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें तथा बिना सत्यापन किसी भी जानकारी को साझा अथवा प्रसारित न करें।
*मीडिया सेल, पुलिस कार्यालय उत्तरकाशी।*
*"नशे को कहें ना, खेलों को बनाएं अपनी पहचान"*
*थानाध्यक्ष मोरी, श्री दीपक रावत* द्वारा मोरी के वाल्टी तप्पड़ में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान स्थानीय युवाओं एवं खिलाड़ियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खेलकूद एवं व्यायाम को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने तथा समाज को भी इस दिशा में जागरूक करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर पुलिस द्वारा उपस्थित युवाओं एवं समिति के सदस्यों को नशा मुक्ति, साइबर अपराधों से बचाव तथा पुलिस हेल्पलाइन संबंधी जागरूकता पंपलेट भी वितरित किए गए।
*पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, श्रीमती कमलेश उपाध्याय* के निर्देशन में उत्तरकाशी पुलिस द्वारा युवाओं को नशे, साइबर अपराध एवं अन्य सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक करने हेतु निरंतर जनजागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
*मीडिया सेल, पुलिस कार्यालय उत्तरकाशी*
*बेहतर यात्रा प्रबन्धन तथा समग्र प्रशासनिक दक्षता हेतु जिला पत्रकार संघ द्वारा एसपी उत्तरकाशी को किया गया सम्मानित।*
जिला पत्रकार संघ (ट्रस्ट) के तत्वावधान में बड़कोट में आयोजित अधिवेशन एवं सम्मान समारोह में *पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, श्रीमती कमलेश उपाध्याय को चारधाम यात्रा-2026 के दौरान उत्कृष्ट यात्रा प्रबंधन, प्रभावी यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, खोया-पाया सहायता सेवाओं तथा समग्र प्रशासनिक दक्षता के लिए "उत्कृष्ट सुशासन गौरव सम्मान–2026" से सम्मानित किया गया।*
सम्मान प्राप्त करने के उपरांत पुलिस अधीक्षक महोदया द्वारा जिला पत्रकार संघ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उत्तरकाशी पुलिस के उन सभी अधिकारी एवं जवानों के समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और अथक परिश्रम का सम्मान है, जिन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान भीषण धूप, वर्षा एवं विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच निरंतर सेवाएं देकर यात्रा एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु, सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने चारधाम यात्रा के सफल संचालन में मीडिया की सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि मीडिया ने यात्रा से संबंधित सही एवं प्रमाणिक जानकारी समय-समय पर श्रद्धालुओं तक पहुंचाई, भ्रामक एवं अपुष्ट सूचनाओं के प्रति जनमानस को जागरूक किया तथा यात्रा व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता वाले विषयों को भी जिम्मेदारीपूर्वक शासन-प्रशासन के समक्ष रखा।
पुलिस अधीक्षक महोदया द्वारा बताया गया कि चारधाम यात्रा-2026 के लिए उत्तरकाशी पुलिस का ध्येय वाक्य " सुविधा, सुरक्षा एवं सम्मान" है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मानित मीडिया बंधुओं, स्थानीय जनता, व्यापारियों एवं श्रद्धालुओं के सतत् सहयोग के साथ यात्रा व्यवस्थाओं को भविष्य में और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं श्रद्धालु-हितैषी बनाया जाएगा।
*मीडिया सेल, पुलिस कार्यालय उत्तरकाशी।*
सम्मान समारोह के दौरान पत्रकार संघ द्वारा यात्रा के दौरान उत्कृष्ट सेवाएं देने पर *पुलिस उपाधीक्षक बड़कोट श्री चंचल शर्मा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक श्री रणवीर सिंह चौहान एवं उपनिरीक्षक यातायात श्री वीरेंद्र सिंह पंवार को भी सम्मानित किया गया।**नशामुक्त पखवाड़ा: गंगोत्री धाम में उत्तरकाशी पुलिस ने दिया नशामुक्त समाज का संदेश*
नशामुक्त भारत एवं ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के तहत *पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, श्रीमती कमलेश उपाध्याय* के निर्देशन में जनपद में संचालित "नशामुक्त पखवाड़ा" अभियान के अंतर्गत आज 25 जून 2026 को उत्तरकाशी पुलिस द्वारा श्री गंगोत्री धाम में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अभियान के दौरान गंगोत्री धाम में दर्शन हेतु आए श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों, इसके सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परिणामों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी विशेष रूप से युवा वर्ग को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहकर स्वस्थ, सुरक्षित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एंटी ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 की उपयोगिता एवं सेवाओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार अथवा नशे से संबंधित किसी भी सूचना को हेल्पलाइन 1933 पर गोपनीय रूप से साझा किया जा सकता है।
सभी नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता फैलाने में पुलिस का सहयोग करें। जनसहभागिता ही नशामुक्त भारत एवं ड्रग्स फ्री देवभूमि के संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति है।
*मीडिया सेल, पुलिस कार्यालय उत्तरकाशी।*
नशामुक्त पखवाड़े के अंतर्गत कोतवाली धरासू पुलिस द्वारा यमुनोत्री हाईवे महर गांव शिवगुफा के पास तीर्थंयात्रियों एवं राहगीरों को नशे के दुष्प्रभावों के जागरूक किया गया। साइबर अपराधों से बचाव तथा पुलिस हेल्पलाइन नम्बरो संबंधी जागरूकता पंपलेट भी वितरित किए गए।*नशे को ना, स्वस्थ एवं खुशहाल जिन्दगी को हाँ कहें।*
*पुलिस, नगर पालिका, मातृशक्ति संगठन एवं ब्रह्माकुमारी की संयुक्त टीम द्वारा आयोजित किया गया नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम।*
"नशामुक्त भारत" एवं "ड्रग्स फ्री देवभूमि" अभियान के अंतर्गत *पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी श्रीमती कमलेश उपाध्याय* के निर्देशन में जनपद में संचालित "नशामुक्त पखवाड़ा" के अंतर्गत थाना पुरोला पुलिस, मातृशक्ति संगठन, नगर पालिका परिषद पुरोला एवं ब्रह्माकुमारी संगठन के संयुक्त तत्वावधान में नगर पालिका परिषद पुरोला सभागार में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रम के दौरान युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों तथा इसके सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परिणामों की विस्तृत जानकारी दी गई। उपस्थित सभी लोगों से नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहकर स्वस्थ, सुरक्षित एवं जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया तथा उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु शपथ दिलाई गई।
इस अवसर पर सभी को *राष्ट्रीय एंटी ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 के संबंध में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। बताया गया कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार अथवा नशे से संबंधित किसी भी सूचना को हेल्पलाइन 1933 पर पूर्ण गोपनीयता के साथ साझा किया जा सकता है, जिससे नशे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।*
*मीडिया सेल, पुलिस कार्यालय उत्तरकाशी।*
*अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर उत्तरकाशी पुलिस का व्यापक जनजागरूकता अभियान**युवाओं, स्थानीय लोगों एवं तीर्थयात्रियों को दिलाई नशा मुक्ति की शपथ*
उत्तरकाशी, 26 जून 2026। *पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, श्रीमती कमलेश उपाध्याय* के निर्देशन में अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर जनपद के विभिन्न थाना एवं कोतवाली क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत स्थानीय नागरिकों, युवाओं एवं तीर्थयात्रियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया।
*थाना मोरी पुलिस* द्वारा किरौली तप्पड़ में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों एवं स्थानीय युवाओं को संबोधित करते हुए नशे से दूर रहने, स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने, नियमित व्यायाम एवं खेलकूद को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशामुक्ति के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को नशा विरोधी शपथ भी दिलाई गई।
*कोतवाली उत्तरकाशी पुलिस* द्वारा विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में सहभागिता का आह्वान किया गया।
*कोतवाली मनेरी पुलिस* ने पर्यटक चौकी हिना पर तीर्थयात्रियों को नशे के विरुद्ध जागरूक करते हुए नशा उन्मूलन की शपथ दिलाई।
इसी क्रम में *कोतवाली धरासू पुलिस* द्वारा चिन्यालीसौड़ पीपल मंडी में आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रम में स्थानीय लोगों एवं युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए "नशे को ना, स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन को हाँ" का संदेश दिया गया।
अभियान के दौरान पुलिस टीमों द्वारा नशा उन्मूलन एवं एंटी ड्रग्स हेल्पलाइन से संबंधित जागरूकता पंपलेट भी वितरित किए गए तथा लोगों को नशे के विरुद्ध सजग एवं जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।
उत्तरकाशी पुलिस का संदेश:
"नशे से दूरी ही सुरक्षित, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है। आइए, नशामुक्त उत्तरकाशी और नशामुक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।"
*मीडिया सेल, पुलिस कार्यालय उत्तरकाशी*
*पदोन्नति।**उपनिरीक्षक श्री भारु सिंह चौहान के निरीक्षक पद पर पदोन्नत होने के उपलक्ष्य में आज दिनांक 27 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, श्रीमती कमलेश उपाध्याय द्वारा उन्हें नवीन पद के पदचिह्न (रैंक) अलंकृत किया गया। पदोन्नति एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने दीर्घ अनुभव, कर्तव्यनिष्ठा एवं कार्यकुशलता के बल पर नवीन दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन तथा समर्पण भाव से करते हुए विभाग की गरिमा एवं जनसेवा की उत्कृष्ट परंपरा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।*
*इस अवसर पर उपनिरीक्षक श्री कोमल सिंह रावत (वाचक, पुलिस अधीक्षक) उपस्थित रहे।*
*पुलिस जवान ने लौटाई नकदी व महत्वपूर्ण दस्तावेजों से भरी अमानत*
आज दिनांक 26.06.2026 को कोतवाली मनेरी में नियुक्त पुलिस जवान दिनेश तोमर को मनेरी झरने के पास एक पर्स मिला, जिसमें ₹10,000 की नकदी के साथ एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद थे।
पुलिस जवान दिनेश तोमर ने ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए पर्स को तत्काल कोतवाली मनेरी में जमा कराया। इसके उपरांत पुलिस टीम द्वारा पर्स स्वामी की जानकारी जुटाई गई और पर्स उसके वास्तविक स्वामी, श्रद्धालु श्री अनिरुद्ध मलिक को नकदी एवं सभी दस्तावेजों सहित सकुशल वापस लौटा दिया गया।
अपना खोया हुआ पर्स सुरक्षित वापस पाकर श्रद्धालु ने उत्तरकाशी पुलिस एवं पुलिस से आभार व्यक्त किया तथा जवान की ईमानदारी की सराहना की।
*भारत की संपूर्ण खबरों के लिए देखिए GANGA 24 EXPRESS (DIGITAL WEB NEWS CHANNEL) पर महेश बहुगुणा & टीम के साथ= 8126216516*
*TET update*: Maharashtra CM Devendra Fadnavis orders SIT under Thane Joint CP Panjabrao Ugale.
CM Devendra Fadnavis spoke to School Education Minister Dada Bhuse & DGP Sadanand Date & directed strictest action against the culprits
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*Micro, Small and Medium Enterprises ( MSME ) Day ~ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) दिवस*
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*Empowering MSMEs through Innovation and Sustainable Industrial Development* ~ 2026 Theme
*“अमंत्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्।”*
06 अप्रैल 2017 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सतत विकास के 2030 एजेंडा को प्राप्त करने में सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों (एमएसएमई) की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने वाला एक प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव (ए/71/279) के तहत 27 जून को "सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यम दिवस" के रूप में नामित किया गया है। आईसीएसबी के सहयोग से, संयुक्त राष्ट्र में अर्जेंटीना के स्थायी मिशन ने इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया, जिसे सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उनके साथ इस पर बातचीत की गई।
इस प्रस्ताव को 54 सदस्य देशों ने संयुक्त रूप से प्रायोजित किया, जो 5 अरब से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2030 के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के एजेंडा को अपनाने के बाद से, सभी देश इसके कार्यान्वयन के लिये काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक हितधारक अपना सर्वोत्तम योगदान दे सके।
*" बड़े उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़, तो MSME उसकी धड़कन "*
अर्थव्यवस्था में बड़े उद्योग जितने महत्वपूर्ण हैं, उतनी ही अहम भूमिका सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी निभाते हैं। यदि बड़े उद्योग अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ हैं, तो एमएसएमई उसकी धड़कन हैं, जो किसी भी देश के दूर-दराज़ इलाकों तक विकास और रोजगार की ऊर्जा पहुँचाते हैं।
अक्सर हम बड़े कॉरपोरेट घरानों की ऊँची इमारतों और उनके विशाल कारोबार को देखकर आर्थिक प्रगति का आकलन करते हैं, लेकिन हमारे देश भारत की असली आर्थिक ताकत उन छोटे-छोटे उद्यमों में छिपी है, जहाँ कोई बुनकर, कोई लुहार, कोई खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) का उद्यमी या कोई छोटा सॉफ्टवेयर डेवलपर अपने परिश्रम और नवाचार से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहा है।
हर वर्ष 27 जून को मनाया जाने वाला 'अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) दिवस' केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है। यह उन करोड़ों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नवप्रवर्तकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने साहस, मेहनत और संकल्प के बल पर न केवल अपनी आजीविका बना रहे हैं, बल्कि देश के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
संस्कृत की एक प्रसिद्ध सूक्ति है “अमंत्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्।” अर्थात् ऐसा कोई अक्षर नहीं जिससे मंत्र न बन सके और ऐसी कोई जड़ नहीं जिससे औषधि न बनाई जा सके। यह सूक्ति हमें सिखाती है कि इस सृष्टि में कोई भी वस्तु, व्यक्ति या विचार निरर्थक नहीं होता; आवश्यकता केवल उसकी क्षमता को पहचानने और उसे सही दिशा देने की होती है। ठीक यही दर्शन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र की कार्यशैली में भी दिखाई देता है। समाज का कोई भी वर्ग, कोई भी कौशल, कोई भी स्थानीय संसाधन अथवा कोई छोटा-सा विचार ऐसा नहीं है, जिसे यह क्षेत्र उद्यम, नवाचार और परिश्रम के बल पर आर्थिक समृद्धि के सूत्र में न बदल दे।
MSME केवल उद्योगों का एक नेटवर्क भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की वह सशक्त आधारशिला है, जो गांव और शहर, अमीर और गरीब, पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक, तथा स्थानीय उत्पादन और वैश्विक बाजार के बीच एक सुदृढ़ सेतु का कार्य करती है। यह क्षेत्र ‘अंत्योदय से सर्वोदय’ के भारतीय विकास-दर्शन को व्यवहार में उतारते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी आत्मनिर्भरता, सम्मानजनक आजीविका और आर्थिक भागीदारी का अवसर प्रदान करता है।
वस्तुतः MSME केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं, बल्कि समावेशी विकास, रोजगार सृजन, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय संतुलन, महिला सशक्तिकरण, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का सबसे सशक्त वाहक है। प्रस्तुत आलेख इसी महत्त्वपूर्ण क्षेत्र की ऐतिहासिक यात्रा, आर्थिक एवं सामाजिक योगदान, वर्तमान चुनौतियों, नीतिगत सुधारों, सरकारी पहलों तथा भविष्य की संभावनाओं का गहन, शोधपरक और व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। साथ ही यह समझने का प्रयास करता है कि किस प्रकार MSME भारत को एक समावेशी, आत्मनिर्भर और वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
परिभाषा का नया अवतार: वैधानिक वर्गीकरण और जमीनी बदलाव
भारत में छोटे और कुटीर उद्योगों का इतिहास सदियों पुराना है। हमारे यहां वैदिक काल से ही अलग-अलग तरह के शिल्प और कुटीर उद्योग फलते-फूलते रहे हैं। लेकिन आधुनिक समय में इसे कानूनी और व्यवस्थित पहचान साल 2006 के MSMED अधिनियम से मिली। समय बदला, तकनीक बदली और वैश्विक बाजार की मांगें भी बदलीं। इसे देखते हुए भारत सरकार ने 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत इसकी पुरानी परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया। यह बदलाव एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ।
पुरानी परिभाषा में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि वह 'मैन्युफैक्चरिंग' (सामान बनाने वाले) और 'सर्विस' (सेवा देने वाले) क्षेत्रों को अलग-अलग चश्मे से देखती थी। साथ ही, उसमें केवल इस बात को आंका जाता था कि आपने मशीनरी या प्लांट में कितना पैसा लगाया है। इसका एक नुकसान यह होता था कि छोटे उद्योग इस डर से अपनी कंपनी को बड़ा नहीं करते थे कि अगर वे थोड़े भी बड़े हुए, तो सरकार से मिलने वाले फायदे, सब्सिडी और टैक्स छूट हाथ से निकल जाएगी। इसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'बढ़ने का डर' (Fear of Growing) या 'बौनापन' (Dwarfism) कहा जाता था। इस डर को खत्म करने के लिए सरकार ने निवेश (Investment) और सालाना कारोबार (Turnover) दोनों को मिलाकर एक नया और साझा मापदंड तैयार किया, जो आज के समय में इस प्रकार लागू है।
*भारत में MSME का नया वर्गीकरण*
भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) का वर्गीकरण निवेश (Investment) और वार्षिक टर्नओवर (Turnover) के आधार पर किया गया है। इसके अनुसार, सूक्ष्म (Micro) उद्यम वे हैं, जिनमें संयंत्र, मशीनरी या उपकरणों में ₹1 करोड़ तक का निवेश तथा ₹5 करोड़ तक का वार्षिक टर्नओवर होता है। लघु (Small) उद्यम वे हैं, जिनमें ₹10 करोड़ तक का निवेश और ₹50 करोड़ तक का वार्षिक टर्नओवर होता है। इसी प्रकार, मध्यम (Medium) उद्यम वे हैं, जिनमें ₹50 करोड़ तक का निवेश तथा ₹250 करोड़ तक का वार्षिक टर्नओवर होता है। यह वर्गीकरण उद्यमों के आकार, उनकी आर्थिक क्षमता तथा सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों के पात्रता निर्धारण का महत्वपूर्ण आधार है। इस नई परिभाषा ने छोटे उद्योगों को मानसिक आजादी दे दी। अब वे बिना किसी डर के अपना कारोबार बढ़ा सकते हैं, नई मशीनें खरीद सकते हैं और अपना टर्नओवर बढ़ा सकते हैं, जबकि उनका सरकारी लाभ भी सुरक्षित रहता है। इस एक कदम ने भारतीय उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर सोचने और बड़ी छलांग लगाने के लिए नए पंख दे दिए हैं।
आर्थिक धड़कन ~ आँकड़ों और शोध के झरोखे से
हम जब भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद (GDP), रोजगार और निर्यात के आंकड़ों को देखते हैं, तो समझ आता है कि MSME को क्यों इस देश का 'साइलेंट हीरो' कहा जाता है। आंकड़े सिर्फ सूखी संख्याएं नहीं होते, वे देश के आम लोगों के पसीने, उनकी मेहनत और उनके हौसले की कहानी बयां करते हैं। देश की जीडीपी में हिस्सेदारी: भारत की कुल जीडीपी में MSME क्षेत्र का योगदान लगभग 30% है। अगर हम सिर्फ विनिर्माण (Manufacturing Output) की बात करें, तो कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 45% से भी ज्यादा है। इसका मतलब है कि देश में बनने वाली लगभग आधी चीजें इन्हीं छोटे कारखानों से निकलती हैं।
❗️रोजगार का सबसे बड़ा समंदर ‼️
खेती के बाद अगर भारत में सबसे ज्यादा लोगों को कोई क्षेत्र काम देता है, तो वह MSME है। आज देश के लगभग 11 करोड़ से भी ज्यादा लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन उद्योगों पर निर्भर हैं। भारत के पास दुनिया की सबसे युवा आबादी है, जिसे हम 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) कहते हैं। इस युवा ऊर्जा को काम देकर देश की ताकत में बदलने का सबसे बड़ा काम यही क्षेत्र कर रहा है।
वैश्विक बाजार में धाक: भारत से विदेशों को होने वाले कुल निर्यात (Exports) में MSME की हिस्सेदारी लगभग 40% से 45% के बीच है। हमारे पारंपरिक हस्तशिल्प, कपड़े, चमड़े का सामान, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Processed Food) और यहां तक कि रक्षा क्षेत्र के बड़े उपकरणों के छोटे-छोटे कलपुर्जे भी इन्हीं लघु उद्योगों में बनते हैं और दुनिया भर में भेजे जाते हैं।
औपचारिकता की ओर बढ़ते कदम: सरकार के 'उद्यम पोर्टल' (Udyam Portal) पर करोड़ों छोटे-बड़े उद्योगों का रजिस्ट्रेशन इस बात का सबूत है कि जो अर्थव्यवस्था पहले बिना किसी कागज़ात के अनौपचारिक रूप से चल रही थी, वह अब तेजी से संगठित और डिजिटल ढांचे में बदल रही है। इससे इन छोटे व्यापारियों के लिए बैंकों से लोन लेना और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना बेहद आसान हो गया है।
*सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय संतुलन का असली संवाहक*
कोई भी आर्थिक विकास तब तक सच्चा नहीं माना जा सकता, जब तक उसका फायदा समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति और देश के सबसे पिछड़े इलाके तक न पहुंचे। अक्सर देखा जाता है कि बड़े-बड़े उद्योग वहीं लगते हैं जहां बंदरगाह हों, बड़े हाईवे हों या बड़े महानगर हों। इसकी वजह से कुछ गिने-चुने शहरों में तो खूब तरक्की हो जाती है, लेकिन हमारे गांव और कस्बे विकास की दौड़ में पीछे छूट जाते हैं। इससे शहरों पर आबादी का बोझ बढ़ता है और गांवों से पलायन होने लगता है। MSME इस गंभीर समस्या का सबसे व्यावहारिक और सुंदर समाधान है। यह देश के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का काम बड़ी खामोशी से करता है।
*ग्रामीण और शहरी असंतुलन को कम करना*
लघु उद्योग देश के सुदूर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में फैले हुए हैं। ये उद्योग किसी बाहरी मदद पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर मिलने वाले कच्चे माल, स्थानीय लोगों के हुनर और हमारी पारंपरिक कलाओं को आधार बनाते हैं। चाहे बनारस की प्रसिद्ध रेशमी साड़ियां हों, मुरादाबाद का पीतल उद्योग हो, या चंदेरी का सिल्क ये सभी स्थानीय पूंजी को वैश्विक मूल्य में बदलते हैं। जब लोगों को उनके घर के पास ही रोजगार मिल जाता है, तो वे अपने परिवार को छोड़कर शहरों की झुग्गियों में रहने को मजबूर नहीं होते। यह क्षेत्र गांवों से शहरों की ओर होने वाले अंधाधुंध पलायन को रोकने वाली एक मजबूत दीवार है।
💃 *महिला सशक्तिकरण की नई इबारत* 💃
MSME क्षेत्र ने भारत की महिलाओं को सिर्फ एक 'मजदूर' या 'श्रम शक्ति' के दायरे से बाहर निकालकर खुद अपनी किस्मत लिखने वाली 'मालकिन और नियोक्ता' (Employer) के आसन पर बैठाया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी वित्तीय योजनाओं का लाभ उठाने वालों में सबसे बड़ी संख्या महिलाओं की है। आज गांव की महिलाओं के छोटे स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा बनाए जा रहे अचार, पापड़ और हस्तशिल्प से लेकर शहरों में महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे बुटीक, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और आईटी स्टार्टअप्स तक, हर जगह महिलाएं अपनी वित्तीय स्वतंत्रता की नई कहानी लिख रही हैं। जब एक महिला उद्यमी बनती है, तो वह केवल एक परिवार को नहीं संभालती, बल्कि पूरे समाज की सोच को बदल देती है।
*हाशिये के समाज को मुख्यधारा में लाना*
विभिन्न शोध और सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश के पंजीकृत MSMEs के मालिकाना हक का एक बहुत बड़ा हिस्सा हमारे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भाई-बहनों के पास है। बड़े उद्योगों में जहां पूंजी की भारी जरूरत होती है, वहीं लघु उद्योग कम पैसे में भी शुरू किए जा सकते हैं। इस वजह से समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों के लोगों के लिए यह क्षेत्र सम्मान और तरक्की का रास्ता खोलता है। यह डॉ. भीमराव आंबेडकर के उस सपने को हकीकत में बदलने जैसा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दलितों और पिछड़ों का असली सशक्तिकरण राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ उनके आर्थिक रूप से मजबूत होने से ही आयेगा।
सरकारी नीतियों का सुरक्षा कवच❗️
आत्मनिर्भरता' की संजीवनी‼️
सरकार ने इस क्षेत्र की अहमियत को बखूबी समझा है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में MSME को सिर्फ कागजी सुरक्षा नहीं दी गई, बल्कि एक पूरा ऐसा माहौल (Ecosystem) तैयार करने की कोशिश की गई है जिससे ये वैश्विक स्तर पर मुकाबला कर सकें। सरकार की कुछ प्रमुख नीतियां और योजनाएं इस क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी साबित हुई हैं।
सबसे पहले बात करते हैं 'आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना' (ECLGS) की। कोरोना महामारी के उस भयावह दौर में जब पूरी दुनिया की सप्लाई चेन टूट गई थी और छोटे धंधे बंद होने की कगार पर थे, तब इस योजना ने लाखों डूबते हुए MSMEs को बिना किसी अड़चन के नकदी (Liquidity) देकर संजीवनी बूटी की तरह काम किया। इसके कारण करोड़ों लोगों की नौकरियाँ जाने से बच गईं।
इसी तरह, छोटे व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत होती थी बैंकों को गारंटी (Collateral) देना। लोन चाहिए तो जमीन या मकान के कागज़ात दिखाओ इस शर्त के चलते कई होनहार युवाओं के विचार सिर्फ विचार बनकर रह जाते थे। सरकार के 'क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट' (CGTMSE) ने इस मुश्किल को आसान कर दिया। अब इस फंड की गारंटी पर बैंक बिना किसी जमानत के भी छोटे लोन दे देते हैं।
विपणन यानी बाजार तक पहुंच के मामले में 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM Portal) ने एक बड़ा खेल बदल दिया है। पहले सरकारी विभागों में सप्लाई का ठेका सिर्फ बड़े-बड़े रसूखदार ठेकेदारों को ही मिलता था। लेकिन इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों के खेल को पूरी तरह खत्म कर दिया है। आज देश के किसी भी सुदूर हिस्से का छोटा बुनकर, बढ़ई या शिल्पकार सीधे भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों को अपना सामान बेच सकता है। इसने बाजार का पूरी तरह से लोकतंत्रीकरण कर दिया है।
इसके अलावा, विश्व बैंक की सहायता से चल रही 'RAMP योजना' (Raising and Accelerating MSME Performance) राज्यों के स्तर पर छोटे उद्योगों के ढांचे को मजबूत कर रही है। वहीं, 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) नीति ने तो कमाल ही कर दिया है। इस योजना ने भारत के हर जिले की एक खास पहचान और वहां के पारंपरिक शिल्प को वैश्विक ब्रांड में बदल दिया है। आज जब विदेशी मेहमान भारत आते हैं, तो उन्हें उपहार में यही स्थानीय उत्पाद दिए जाते हैं, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की वैश्विक गवाही देते हैं।
*समकालीन चुनौतियाँ ~ आज की जमीनी मुश्किलें*
ऐसा नहीं है कि सब कुछ बिल्कुल हरा-भरा और आसान है। अगर हम व्यावहारिक धरातल पर देखें, तो आज भी हमारा MSME क्षेत्र कई ऐसी दिक्कतों और चक्रव्यूह से जूझ रहा है, जिनका समय रहते समाधान करना बेहद जरूरी है। जब तक हम इन कमजोरियों को नहीं समझेंगे, तब तक हम इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाएंगे।
MSME के समक्ष चुनौतियां : वर्तमान समय में MSME क्षेत्र अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें समय पर बैंक ऋण न मिलना (क्रेडिट गैप), बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा भुगतान में देरी, आधुनिक तकनीक एवं मशीनों के अभाव में तकनीकी पिछड़ापन तथा वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतें प्रमुख हैं।
*पैसों की तंगी और क्रेडिट गैप*
आज भी हमारे देश की औपचारिक बैंकिंग प्रणाली (बैंक और वित्तीय संस्थान) छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को लोन देने में बहुत कतराती है। कागजी कार्रवाई की जटिलता, सिविल स्कोर की शर्तें और क्रेडिट रेटिंग न होने की वजह से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के छोटे दुकानदार या उद्यमी मजबूरन गांव के साहूकारों और अनौपचारिक स्रोतों के चंगुल में फंस जाते हैं। वहां उन्हें इतना भारी ब्याज देना पड़ता है कि उनके मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा उसी ब्याज को चुकाने में चला जाता है।
*देरी से भुगतान का दंश*
यह इस क्षेत्र की सबसे दुखती रग और एक तरह का कैंसर है। छोटे उद्यमी बड़े कॉरपोरेट घरानों या सरकारी विभागों को माल की सप्लाई तो कर देते हैं, लेकिन उनका भुगतान महीनों तक अटका रहता है। कानून के मुताबिक 45 दिनों के भीतर भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन जमीन पर ऐसा बहुत कम होता है। इन छोटे व्यापारियों के पास बहुत ज्यादा पूंजी नहीं होती कि वे महीनों बिना पैसों के काम चला सकें। रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए पैसे न होने के कारण कई अच्छी-भली फैक्ट्रियां समय से पहले ही दम तोड़ देती हैं। हालांकि सरकार ने इसके लिए 'समाधान पोर्टल' बनाया है, लेकिन इसका डर अभी बड़े खरीदारों के मन में पूरी तरह नहीं बैठा है।
*तकनीकी आधुनिकीकरण का अभाव*
आज दुनियाँ चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के दौर में जी रही है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और ऑटोमेशन की बातें हो रही हैं। लेकिन हमारे देश के बहुसंख्यक MSME आज भी दशकों पुरानी मशीनों और पारंपरिक तौर-तरीकों पर काम कर रहे हैं। तकनीक पुरानी होने की वजह से सामान बनाने में समय ज्यादा लगता है, लागत (Cost) बढ़ जाती है और फिनिशिंग वैसी नहीं आ पाती जैसी विदेशी प्रोडक्ट्स (विशेषकर चीनी उत्पादों) की होती है। इस वजह से वे अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं।
*कच्चे माल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव*
वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण कच्चे माल जैसे स्टील, एल्यूमीनियम, प्लास्टिक और रसायनों की कीमतें अचानक बहुत बढ़ जाती हैं। बड़े उद्योगों के पास तो इतना पैसा और स्टॉक होता है कि वे इस झटके को बर्दाश्त कर लेते हैं, लेकिन छोटे उद्योगों के पास ऐसा कोई वित्तीय बफर नहीं होता। कच्चे माल की कीमत थोड़ी भी बढ़ी नहीं कि उनका पूरा बजट गड़बड़ा जाता है और वे घाटे में चले जाते हैं।
हरित, डिजिटल और वैश्विक विकास की ओर MSME
अगर हमें 21वीं सदी के इस दौर में भारतीय MSME को दुनिया का लीडर बनाना है, तो हमें एक त्रियामी मंत्र को अपनी रग-रग में बसाना होगा। यह मंत्र है: हरित (Green), डिजिटल (Digital) और वैश्विक (Global)। अब छोटे उद्योगों को अपनी पुरानी सोच से बाहर निकलकर इन तीन मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।
शून्य दोष, शून्य प्रभाव : आज पूरी दुनिया पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर बेहद संवेदनशील हो चुकी है। अब केवल सामान बनाना काफी नहीं है, बल्कि यह भी देखा जाता है कि उसे बनाने में पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा। हमारे उद्योगों को 'शून्य दोष' (ताकि उत्पाद की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो और वह कहीं रिजेक्ट न हो) और 'शून्य प्रभाव' (ताकि कारखाने से निकलने वाला प्रदूषण पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए) की संस्कृति को अपनाना होगा। जो उद्योग पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होंगे, आने वाले समय में दुनिया उन्हीं के उत्पादों को हाथों-हाथ लेगी।
डिजिटल साक्षरता और ई-कॉमर्स का हाथ थामना:
आज के जमाने में डिजिटलाइजेशन कोई शौक नहीं, बल्कि जिंदा रहने की पहली शर्त है। अगर आपका बिजनेस इंटरनेट पर नहीं है, तो मानकर चलिए कि आप रेस से बाहर हैं। हमारे छोटे उद्यमियों को स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए करना होगा। सरकार के 'ओएनडीसी' (ONDC - Open Network for Digital Commerce) जैसे ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म्स का फायदा उठाकर छोटे से छोटा दुकानदार भी बिना किसी बड़ी फीस के देश भर के ग्राहकों तक पहुंच सकता है। डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बहीखाता और सोशल मीडिया के जरिए मार्केटिंग को अपनाकर ही ये उद्योग बड़े बन सकते हैं।
क्लस्टर आधारित विकास❗️
एक साथ मिलकर आगे बढ़ना‼️
कहते हैं कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, लेकिन जब बहुत सी कड़ियां आपस में जुड़ जाती हैं, तो एक मजबूत जंजीर बन जाती है। जब एक ही तरह का काम करने वाले कई छोटे उद्योग एक 'क्लस्टर' (समूह) में आकर काम करते हैं, तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। वे सब मिलकर एक साझी टेस्टिंग लैब बना सकते हैं, कच्चे माल का एक बड़ा बैंक स्थापित कर सकते हैं और प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक साझा प्लांट (CETP) लगा सकते हैं। इससे हर एक उद्यमी का व्यक्तिगत खर्च बहुत कम हो जाएगा और वे बड़े उद्योगों की तरह कम लागत पर बेहतरीन उत्पादन कर पाएंगे।
'लोकल से ग्लोबल' होते भारत का उज्ज्वल क्षितिज
अंततः, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस केवल भाषण देने या सरकारी आंकड़े गिनाने का औपचारिक आयोजन नहीं है। यह भारत के उस अटूट संकल्प को दोहराने का दिन है जिसके केंद्र में "श्रम एव जयते" और "आत्मनिर्भरता" का सच्चा भाव छिपा है। MSME क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का वह छुपा हुआ कल्पवृक्ष है, जिसे यदि सही नीतियों का साफ पानी, समय पर बैंक लोन की खाद और आधुनिक तकनीक की सही धूप मिल जाए, तो यह भारत को एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत @2047) बनाने के संकल्प को बहुत आसानी से हकीकत में बदल सकता है।
हमें यह बात गहराई से समझनी होगी कि भारत की असली आत्मा सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों के चमचमाते कॉरपोरेट टावरों या शीशे के दफ्तरों में नहीं बसती। भारत की असली आत्मा हमारे टियर-2, टियर-3 शहरों और गांवों की उन संकरी गलियों में धड़कती है, जहां कोई आम हिंदुस्तानी अपनी छोटी सी लेथ मशीन, अपने हैंडलूम या अपनी छोटी सी दुकान पर दिन-रात पसीना बहा रहा है। ये लोग सिर्फ सामान नहीं बनाते, ये हर रोज भारत का भाग्य बनाते हैं।
किसी कवि ने बहुत सुंदर लिखा है: "लघुता को न तुम हेय समझो, यह तो सृष्टि का सार है, सिंधु की हर एक बूंद में, छिपा अनंत संसार है।" इस MSME दिवस पर सबसे बड़ी जरूरत इसी बात की है कि हम इन छोटी इकाइयों को 'छोटा' समझकर उनके प्रति हीनभावना रखना छोड़ें और उनकी छिपी हुई विराट ताकत को पहचानें। जब हमारे देश के इस 'लोकल' हुनर को सही मायने में सरकार, समाज और बैंकों का पूरा सहयोग (वोकल) मिलेगा, तभी यह पूरी शान से 'ग्लोबल' बन पाएगा। जब देश के हर हाथ को काम मिलेगा और हर छोटे विचार को उद्योग बनने का मौका मिलेगा, तभी हमारी आर्थिक आजादी अक्षुण्ण रहेगी। यही इस दिवस की असली सार्थकता है और यही हमारे प्यारे भारत के आर्थिक भविष्य का सबसे सुंदर और सुनहरा रास्ता है।
Micro, Small and Medium-sized Enterprises (MSMEs) are the backbone of economies worldwide, representing more than 90 per cent of businesses and contributing significantly to employment, livelihoods and economic growth. As the world confronts intersecting economic, social, environmental and technological challenges, empowering MSMEs through innovation and sustainable industrial development is essential to building resilient economies, advancing Sustainable Development Goal 9 (Industry, Innovation and Infrastructure) and accelerating progress across the 2030 Agenda for Sustainable Development.
Micro, small and medium-sized enterprises are key sources of jobs, income, and local growth—especially for women, young people, and vulnerable groups. Their size and flexibility help build strong, fair, and sustainable communities.
*Challenges*
However, many of these businesses face serious challenges. They often struggle to get loans, deal with poor infrastructure, and work under tough conditions. Many operate informally, which limits their access to funding, legal rights, and government support.
Today’s global challenges—like political tens, legal rights, and government support.
Today’s global challenges—like political tens





































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